यात्रा: मिथिला दलान
धर्मेन्द्र विह्वल
नेपालक धनगढ़ी, कैलाली जिला आ सुदूरपश्चिम प्रदेशऽक मुख्यालय अइछ । एहिबेर एतऽ जेबाक कार्यक्रम बहुत पहिने सँ निर्धारित नै रहए । मात्र तीन÷चाइर दिन पहिने नेपाल पत्रकार महासंघ सुदूरपश्चिम प्रदेशऽक अध्यक्ष भरत शाह आ महासचिव शिवराज भट्ट सँ फोनपर बात भेल छलए । ओ दुनूगोटे प्रदेशऽक रेडियोक पत्रकारलोकैन हेतु २०८२ अगहनऽक पहिल आ दोसर (एक आ दू गते)दिन सञ्चालन कएल जाएबला एक प्रशिक्षण कार्यक्रमकेँ सहजीकरणऽक जिम्मेबारीक प्रस्ताव करैत एबाहेतु आमन्त्रण केने रहैथ ।
हम मलंगवा सँ घुरबाक क्रममे जनकपुर विमानस्थलपर रही । २०८२ कातिकऽक २७ गते रहैक । हम फोनेपर हुनकासभकेँ कहने रहियैन, हम काठमाण्डू पहुँच कऽ अपन कार्यव्यस्तता बुइझ साँझ धैर खवर करै छी । प्रत्यक्षतः हम जे किछु कहने होइयैन से अलग बात छै मुदा धनगढ़ीक आमन्त्रण हमरा अस्वीकार नै कएल होइए । जेबाक मोन हमरा छलए । किएक ने किए धनगढ़ी सँ हमरा एक प्रकारक आत्मीय निकटताक बोध होइत रहल अइछ । एतऽ हमरा नीक लगैए । सुदूरपश्चिमऽक पत्रकार मित्रसभऽसँ भावनात्मक सम्बन्धक बोध हमरा होइत रहैए । धनगढ़ी जेबाक कोनो अवसर हम छोड़ नै चाहै छी । एहुबेर तहिना भेलै ।
काठमाण्डू आइब शाह आ भट्ट दुनूगोटेकेँ हम फोनपर धनगढ़ी एबाक जनबत करौलियैन । धनगढ़ी हमरा अनेक कारण सँ विशेष बुझाइए । एकटा कारण अइछ, एतौका मिश्रित समाज । मिथिलाक थोड़बहुत सुगन्ध । हमरा बुझने पश्चिम नेपालऽक तीनटा नगर धनगढी, नेपालगञ्ज आ गुलरियामे मैथिलीभाषीक उपस्थित उल्लेख्य अइछ । हमरा ई तीनु नगरक समाजमे अपन मैथिल समाजकऽ झलक भेटैए ।
धनगढ़ी हमरा बेरबेर आकर्षित करैत रहल अइछ, तकर एक कारण ओतऽ मैथिलीभाषी समाजक उपस्थित सेहो अइछ । हम २०८२ क कातिकऽक ३० गतेक साँझ श्री एयरलाइन्सक विमान सँ धनगढी पहुँचल रही । विमानस्थलपर हमरा लेबऽ पत्रकार महासंघ कैलालीक पूर्वअध्यक्ष हिमाल जोशी आएल रहैथ । हम हुनक मोटरसाइकलपर सवार भऽ रंगशालाक नजदिकमे अवस्थित होटल आस्था पहुँचलौं । धनगढ़ी एहिबेर हमरा कनेक विकसितजकाँ बुझाएल ।
वस्ती व्यवस्थित बुझाएल । सडकसब सेहो नीक लागल ।साँझऽक करिब साढे पाँच बाइज गेल छल, कोठलीमे जा कल्हुका तयारीमे व्यस्त भऽ गेलौं । हमर कोठलीक खिडकी रंगशालादिसि खुलैत छलै । रंगशाला एहि बातऽक प्रमाण छलए जे प्रदेशऽक खेल क्षेत्र ।ेहो बेस सक्रिय अइछ । बाहरे सँ रंगशाला गतिशील छै ताहि बातऽक यथेष्ट प्रमाण पाओल जा सकैत छलै । कनेकालऽक बाद हमर पुरान मित्र आ स्थानीय वरिष्ठ पत्रकार मनमोहन स्वाँर जी एलाह । जहिया हम नेपाल पत्रकार महासंघऽक केन्द्रीय अध्यक्ष रही तहिया मनमोहनजी हमर कार्यसमितिक सदस्य आ सुदूरपश्चिमऽक संयोजक रहैथ । कनेकाल हुनकासँग समय बितेलौं ।
धनगढ़ी सँ ४२ वर्ष पुरान सम्बन्ध
एहिबेर ई शहर हमरा कनेक बदललसन कनेक विकसितसन बुझाएल । ओना हम पछिला ४२वर्ष सँएहि नगरकेँ चिन्हैत छियै । हम एहि शहर सँ निरन्तर सम्पर्कमे छी । पत्रकार हेबाक कारणे हम मात्र एतौका पत्रकारिताक गतिविधिक साक्षीटा नै छी, बल्कि एहि कालखण्डमे एतऽ जे सामाजिक, राजनीतिक आ भौतिक विकास भेल अइछ ओकर प्रत्यक्षदर्शी सेहो छी। हम गवाह छी, एहि ठामऽक विकासऽक । पिताजीक नौकरीक कारणेँ वि.सं २०४० सँ २०५२ क अवधिमे एक–दूबेर धनगढ़ी गेल हएब, मुदा सेहो नीकजकाँ मोन नै अइछ ।
एकरबाद २०५३÷५४ सँ एहि शहर सँ एक पत्रकारऽक रुपमे लगातार सम्ंपर्कमे छी हम । पश्चिम नेपालऽक मुख्य वाणिज्य नगरीधनगढ़ीमे तहिआ आइजकाँ विकसित सड़क, बजार, होटल आदि नै छलै । मुदा आब अवस्थामे बहुत परिवर्तन आइब गेल छै । वजारक चहलपहल एहि बातऽक साक्षी अइछ–पछिला दिनमे एतौका आर्थिक गतिविधिमे तीव्रता एलैए ।

हम धनगढ़ी कहिआकहिआ आ कोनकोन प्रयोजनमे एलौं, ताही बातऽक पूर्ण स्मृति आ अभिलेख हमरालगऽ नै अइछ । मुदा धनगढ़ीक पहिल यात्रा हमरा थोड़बहुत मोन पड़ैए । आई सँ ४२ वर्ष पहिने अर्थात वि.सं. २०४० सालऽक कोनो महिना । हमर पिताजीक स्थानान्तरण कञ्चनपुर जिलामे भेल रहैन । ओतऽ जेबाक क्रममे हमहुँ हुनकर पछोड़ धेने रही । एहि क्रममे भारतऽक पलियाकलाँहम आ पिताजी दुपहर एक बजेक करीब पहुँचल छलौं । ट्रेन सँ उतैर स्टेशन सँ बाहर निकलैतकाल मोनमे एकटा जिज्ञासा उत्पन्न भेल रहए जे कोन नव जगहपर पहुँंचल छी?
बाल्यावस्था सँ आगाँ बढैत किशोर वयमे प्रवेशक अवस्था । एखन हमरा लगैए, व्यवहार बालशुलभे छल । स्टेशन सँ बाहर निकललापर भूख लागल बात पिताजीकेँ कहलियैन आ पिताजी हमरा एकटा साधारण होटलमें लऽ गेलाह। जलखैखेलौं । आब आगूक यात्रालेल तैयार हेबाक समय आइब गेल छल। पिताजीक अनुसार अगिला गन्तव्य गौरीफन्टा आ फेर धनगढ़ी छल ।
हमसब बीच जंगलसँ साधारण बसमे गौरीफन्टा पहुँचलौँ । गौरीफन्टा सँ मोहना नदी पार कऽ रिक्शासँ धनगढ़ी पहुँचल रही । एखन मोहना नदीक समीप नेपाली भूमिपर एकटा छोटसन बजार, जे डोके बाजारक नाम सँ जानल जाइत अछि, अवस्थित अछि । पहिने ई वजार नै रहैक । सबकिछु नव बुझारहल छल । हम एहि इलाकामें नव छलौं आ ओतऽ सबकिछु नव लाइगरहल छलए ।
पश्चिम नेपालके‘गेटवे’
धनगढ़ी, नेपालऽक सुदूरपश्चिम प्रदेशऽक राजधानी शहर अइछ । एहि शहरऽक नामकरणऽक सन्दर्भमे अनेक किंवदन्ती अइछ । केओ कहैत छैथ जे ई एहन जगह अइछ जतऽ धन गाड़ल जाइत छलै, त केओ एकरा एहन जगहक रूपमे सेहो चिन्हित करैत छैथ जतऽ धानऽक उत्पादन बेसी होइत अइछ । थारु समुदायक पैघ उपस्थिति रहल कैलाली जिलाक मुख्यालय धनगढ़ीमे उत्तरी पहाड़ सँ स्थानान्तरण कऽ आएल लोकऽक उल्लेखनीय संख्या छै । हमरा मोन अइछ जे ओहि समयमे शहरऽक हालत नीक नै छल। मुदा एकटा बात निश्चित जे धनगढ़ी ओहि समय सँ नेपालक पश्चिमी ‘द्वार’ नगरऽक रूपमे चर्चित रहैत आएल अइछ ।
हमरा बुझने आइयो एकर प्रभाव कम नै भेल अइछ । हँ, हमरासभऽसन लोकहेतु निश्चय ई शहर दूरस्थ छै । हमहीटा नै नारायणी पूवऽक कोनो लोककेँ ई स्थान दूर बुझाइत छै । तहिया तँ ठीके बड़ दूर छलै । मुदा आब सड़क आ आकाश मार्गक विकास भेलैए, एतऽ आबऽजाबऽमे पहिलेजकाँ समय नै लगै छै । तहिया हमरा मोन पड़ैए जनकपुर सँ बस आ रेलऽक बहुत लम्बा यात्रा केलाक बाद हमरालोकैन एतऽ धैर आएल रही ।
आब स्थिति बहुत बदैल गेल अइछ। आई एहि शहर सँ सड़क मार्गक माध्यमे नेपालक कोनो स्थानपर गेल जा सकैत छी, जखन कि दस किलोमीटर उत्तरमे अवस्थित अतरिया सँ सुदूरपश्चिम नेपालक सबटा पहाड़ी जिलाहेतु सड़क सञ्जाल चतरल छै । नजदीकेमे रहल भारतीय शहर पलियाकलाँ आ वनवासा सँ भारतऽक कोनो स्थान धैर सड़क आ रेलऽक माध्यमे यात्रा कएल जा सकै छै ।
पहिलबेर धनगढ़ी पहुँचबाक तिथि निश्चित मोन नै अइछ, मुदा ओ समय मोन पड़ैत अइछ तऽ लगैए जेना चाइर दिनक यात्राक बाद हमरालोकैन धनगढ़ी पहुँचल रही । आजुक धनगढ़ी देखै छी त लगैए जेना पुरना धनगढ़ी एक स्वप्न छलए । आजुक धनगढ़ीक विकास अतुलनीय अइछ । मुदा एकटा बात स्वीकार करहि पड़त जे एहि शहरऽक निर्माण एकहि दिनमे नै भेल अइछ ।
सामाजिक सद्भावके शहर
धनगढ़ीक एकटा आओर पक्ष महत्वपूर्ण छै, हमरा विचारे धनगढ़ी सामाजिक समरसता आ सद्भावक शहर अइछ । नेपालऽक पश्चिम तराईमे शायद एहन सामाजिक विविधता मुदा सद्भावयुक्त परिवेश आना कोनो दोसर शहरमे नै अइछ । हार्दिकता एहि शहरक गहना अइछ । सब भाषा, बोली, जाइत, धर्म आ समुदायबीचऽक एतौका सामञ्जस्य अन्य शहरलेल सेहो अनुकरणीय अइछ ।
किछु वर्ष पूर्व धनगढी आ कैलाली खण्ड–अखण्ड आ थारुहट आन्दोलनक पीड़ा सहबालेल बाध्य भेल छल । जँ एकरा अपवाद मानल जाए तँ
कैलालीक समाज एकसँग मिलि कऽरहऽबला समाज अइछ। धनगढ़ीएकर प्रत्यक्ष प्रमाण अइछ । धनगढ़ीमे सबतरहक जाइत आ संस्कृतिक लोकमिलि कऽ रहैत अइछ । धनगढ़Þी सबकेँमान सम्मान, आ स्थान उपलब्ध करौने अइछ । ई शहर लगातार सबकँे अपना भीतर समेटबाक प्रयास करैत रहल अइछ। पहाड़ सँ उतरल लोक होइथ वा तराई मधेश सँ पश्चिमदिस बढ़ल लोक होइथ, धनगढी सबके हृदय सँ स्वीकार केने अइछ । असलमे आजुक दिनमे एहि शहरऽक ताकत सेहो इएह सद्भावपर आधारित अइछ।
धनगढीमे मिथिला ‘कनेक्सन’
आधुनिक धनगढ़ीकनिर्माणमें सबहक योगदान अइछ । एकर निर्माणमे सुदूरपश्चिमऽक लोकऽक योगदान महत्वपूर्ण तँअछिए, पूर्वी नेपालऽक नेपालीक भूमिका सेहो कम महत्वपूर्ण नै अइछ । सुदूरपश्चिमऽकसात पहाड़ी जिलाक सँगहि पड़ोसी बाँके आ बर्दिया जिलाक अतिरिक्त मिथिला क्षेत्रक सिरहा, सप्तरी, सर्लाही, धनुषा आ महोत्तरी जिलाक लोकऽक उल्ल्ेख्य उपस्थिति अइछ धनगढ़ीमे ।
एतऽ झा, मिश्रा, यादव, ठाकुर, मण्डल, कर्ण, साह, शुक्लासन मिथिलाक उपनामबला लोकऽक उपस्थिति पाओल जा सकैए, सेहो भव्य उपस्थिति । धनगढ़ीक आर्थिक, सामाजिक आ राजनीतिक गतिविधिमें एहि लोकऽक योगदान महत्वपूर्ण अइछ । पूर्वी मधेश सँ आइब कऽ एतऽ रहनिहारमे सँ अधिकांश व्यक्तिक शिक्षण पेशा सँ पैतृक सम्बन्धजकाँ छैन ।
विगतमे बहुतो एहन लोक जे सुदूर पहाड़ी जिलामे शिक्षाक इजोत पसारऽ आएल छलाह से बादमे धनगढी आइब एतहि बैस गेलैथ आ ई नगर हुनकालोकैनकेँ स्वीकार करैत अपनाभीतर स्थान दऽ कऽसंरक्षित करैत आएल अइछ । हुनकालोकैन अधिकांशक बालबच्चा आब एहि ठाम विभिन्न व्यवसायमे संलग्न छैथ । स्थानीय उद्योेग वाण्ज्यि संघके मोताबिक एहि नगरक आर्थिक गतिविधिमे मिथिलामे मूल डीह रहल लोकऽक पैघ योगदान अइछ । स्थानीय पत्रकार सिद्धराज भट्टक कहब छैन, एहि नगरमे करिव सात सओके आसपास मैथिलीभाषी मतदाता होबाक अनुमान छै । एखनो जा देखल जाए तँ सुदूरपश्चिमऽक सब जिलामे मिथिलाक लोकऽक उपस्थिति कोनो ने कोनोरुपेँ पाओल जा सकैए ।
मिथिलाक लोक एहि भूगोलमे शिक्षाक अतिरिक्त आनोआन क्षेत्रमे क्रियाशील छैथ । धनगढी घुमैतकाल बीच–बीचमे सञ्जय चौधरी, प्रेमचन्द्र झा आ रोहित मिश्रलगायतक मित्र सँ हमरभेंट होइत रहल अइछ । एहि नगरमे आब मिथिलाक लोकऽक उपस्थितिमे दशमी, शुकराति, छैठ पावैन खुब धुमधाम सँ मनाओल जाइत अइछ ।
मोहना नदीक छैठ घाटपर छैठक गीत आब एतऽ खुब सुनाई पड़ै छै । एतबए नै एतहुक किछु मैथिलक घरमे सामा चकेवा, चौरचन, अनन्त चतुर्दशी पावैन सेहो मनाओल जाइत अइछ । कहबाक तात्पर्य ई जे मैथिल अपन संस्कार आ संस्कृति मिथिला सँ बहुत दूरस्थ रहल नगरमे सेहो लऽ आएल छैथ आ अपन भावी पुस्ताकेँ सेहो अपन पहिचान आ परिचय हस्तान्तरण कऽ रहल छैथ । धनगढ़ीक मैथिलक गतिविधिक प्रभाव पछिला दिनमे सम्पूर्ण सुदूरपश्चिममे पइड़रहल छै आ पश्चिम नेपालमे मिथिलाक संस्कार आ परम्परा क्रमशः लहरारहल अइछ जँ कही तँ अन्यथा नै हएत ।
एहि आधारपर कखनोकाल एहन बुझाइत अइछ जे धनगढ़ी आगन्तुकऽक नगर अइछ आ स्वाभाविक अइछ जे एहि ठामऽक राजनीति आ आर्थिक क्षेत्रमे आगन्तुकऽक प्रभाव निर्णायक रहल अइछ । धनगढ़ी हुनकालोकैनकेँ अपनत्वक भाव देने छैन, मुदा धनगढ़ीकेँ हुनकालोकैन सँ कतेक अपनत्वक भाव प्राप्त भेल छै ? ई प्रश्न विचारणीय छै ।
किछु आओर कारण अइछ जे पछिला दिनमे धनगढ़ी चर्चामे रहल अइछ, पहिल, आधुनिक हवाई अड्डा, दोसर, गेटा इंस्टीट्यूट ऑफ हेल्थ साइन्सेज (जे बनल तँ अइछ मुदा एखन धैर सञ्चालित नै भेल अइछ), तेसर, सुदूरपश्चिमऽक अस्थायी राजधानी, चारिम, सुदूरपश्चिमऽक प्रवेशद्वार आ पाँचम,श्री बेहडा बाबाकनगर ।
हमरालेल धनगढ़ीक बीच वजारमे अवस्थित भगवान लक्ष्मीनारायणके मन्दिर खास अइछ । एहि मन्दिरक स्थापना कहिआ भेल से तँ नै कहि, मुदा हम जहिआ सँ धनगढ़ी जनैत छी ई मन्दिरकेँ निरन्तर देखैत आइबरहल छी । एकटा बात आर महत्वपूर्ण अइछ, धनगढ़ीक नगर क्षेत्रमे व्यापक विकास आ परिवर्तन देखल गेलैए मुदा जाइन ने किए एहि मन्दिरक विकास होइत हम नै देखलियैए ।
एहिबेर बहुत दिनके बाद हम ई नगरमे आएल रही, एहुबेर हम मन्दिरकेँ ओहिना देखलियै । बुझाएल मन्दिर वर्षो सँ एकहि स्वरुपमे अवस्थित अइछ । धनगढ़ीक भगवान काइल जतऽ छलैथ जे रुपमे छलैथओ आइयो ओतहि आ उएह रुपमे छैथ, कोनो खास बदलाव नै आएल अइछ । हम इएह निष्कर्षक सँग २०८२ अगहनऽक दोसर दिन अर्थात २ गते एतऽ सँ काठमाण्डूहेतु प्रस्थान केने रही ।
(राष्ट्रिय समाचार समितिक अध्यक्ष धर्मेन्द्र झा, पत्रकारिता, साहित्य एवम् समसामयिक विषयसबमे सशक्त रुपमे कलम चलबैत आइब रहल छइथ ।) सं.


