धर्मेन्द्र विह्वल
मिथिला क्षेत्रक एक प्रसिद्ध वस्ती अइछ –बोदेबर्साइन । बर्साइन बजार पहुँचैत भोरऽके करिव साढ़े सात बाइज गेल छलै । तिलाठी सँ चलबाकाल अर्थात २०८२ सालके माघऽक एगारहम दिन, मौसम नीक नै रहितो इजोतलेल संघर्ष करैत सुरुजदेवऽक दर्शन भेल छलए । राजविराज सँ आगाँ बढि़ते जाइन ने कतऽ सँ कुहेश एलै आ सुरुज किरिनकेँ दबोइच लेलकै । अचानक मौसम भयाओन भऽगेल छलै । लागल जे जाड़ बइढ़ गेल होइक । राजविराज सँ खर्साल, जमुनी, खुरहुरिया, मलेकपुर, पत्थरगाढ़ा होइत हमरासभऽक गाड़ी अर्नाहा पहुँचल रहए, लागल एना जे कुहेशक कारण रस्ताक आगाँ धुवाँएल अन्हारसन भऽगेल होइक । गाड़ीक गति कम भऽ गेलै । हम मौकाक लाभ उठेलौं, मोवाइल सँ कुहेशबीच अर्नाहा वस्तीक फोटो खिचलौं । गाड़ी आगाँ बइढ़रहल छलए । बनौली आ जाँजरके बाद बोदेबर्साइन । बर्साइनमे रहनिहार राससकर्मी पत्रकार अनुज उमेश साहके सम्पर्कमे हम रहैत छी । ओहि दिन सेहो हम हुनकर सम्पर्कमे रही । संयोग एहन जे ओहि दिन ओ घड़ी पावैनकेँ सन्दर्भमे बर्साइन सँ बाहर रहैथ ।
शक्ति आ शिक्षाक केन्द्र बर्साइन
उमेशेक कारण वर्साइन चौकमे चाह आ जलखैक दोकान चलौनिहार श्रीकिसुन ंिसंह सँ आब हमरो नीक जान–पहचान भऽ गेल अइछ । हम एहि रस्ते जँ यात्रा करै छी तँ सिंहजी सँ भेट करबाक आ कम सँ कम एक कप चाह पिबाक प्रयास करितेटा छी । ओहि दिन सेहो हमर गाड़ी सोझे सिंहजीक दोकानपर रुकलै । ओतऽ मुरही, चुड़ा, घुघनी, आलु चप, कचरी, दहीसम्मिलित जलखै चललै । हमरासँग पत्नी मुन्नी, पुत्र आदित्य आ गाडीचालक यादव गोतामे रहैथ । मुन्नी आ आदित्य सेहो आब करिबकरिब एहि दोकानऽक जलखैक अभ्यस्त भऽगेल छैथ । जलखैक स्वाद नीक–बेजाए अपना ठाम छै, मुदा ताजा आ शुद्धताक ग्यारेन्टी हम लऽ सकै छी । एतौक जलखै हमरा नीक लगैए । हमसभ ओतऽ कनेकाल उमेशऽक प्रतीक्षा केलौं । फोन सम्पर्कपर छलौ हमरालोकैन । जनतब भेटल, हुनका कने विलम्ब हेतैन । जलखैपश्चात हमसब ओतऽ सँ विदा भेलौं । समय करिव सवा आठ भऽगेल छलै । मौसमक मिजाजऽक कारण एना बुझाएल जेना बर्साइनमे एखन नीकजकाँ भोर नै भेलैए । वजारमे लोकऽक जुटान नै भेल रहै । चुनावक समय छै, मुदा चुनावक रंग जेना एखनो फिका छै ।

सप्तरी जिलाक पश्चिम–दक्षीण क्षेत्रमे राजविराज सँ करिव १७ किलोमीटरक दूरीमे अवस्थित वर्साइन वजार इतिहास सँ वर्तमान धैर राजनीतिक हिसाबे शक्तिकेन्द्रक रुपमे स्थापित रहैत आएल अइछ । एहि क्षेत्रक बहुतो राजनीतिकर्मी सप्तरीएटामे नै बल्कि नेपालेमे चिन्हल–मानल जाइत छैथ । एतऽ सँ आठ किलोमीटरक दूरीपर प्रसिद्ध भारतीय वजार लौकही अवस्थित छै । लौकही सँ सटल लौकहा धैर भारतीय भूमिमे पहिने जयनगर आ लदनियाँ सँ रेल चलै छलै । एखन एहि क्षेत्रमे रेल्वेसेवा बन्द छै । एहि क्षेत्रक लोकऽक कहब छैक– जहिया एतहुका नेपाली क्षेत्रमे यातायातके नीक साधन उपलब्ध नै रहै तहिया भारतीय क्षेत्रमे उपलब्ध यातायातऽक साधन बहुत सहयोगी रहै । एहि क्षेत्रक बहुतो लोक भारत जा कऽ नेपालऽक राजविराज, सिरहा आ जनकपुर धैर जाइत छलैथ, आ ई अनुभव रहल अनेको व्यक्ति समाजमे एखनो उपस्थित छैथ । मुदा आब अवस्थामे परिवर्तन एलैए । आब नेपालेक रस्ता भऽ नेपालभैर यात्रा कऽ सकबाक अवस्थाक निर्माण भेल छै । एतौका अवस्थामे आमूल परिवर्तन एलै हुलाकी सड़क सञ्चालनके बाद । यातायातऽक कारणे ई क्षेत्र तहिया विकट मानल जाइत रहै । जिलाक उत्तरी आ पूर्वी क्षेत्र सँ सम्पर्क करबामे दिक्कत रहै, मुदा शैक्षिक दृष्टिएँ ई क्षेत्र उन्नत मानल जाइत छलै । बर्साइन वजारमे अवस्थित प्रसिद्ध चन्द्र नमुना माध्यमिक विद्यालयक स्थापना ७० वर्ष पहिने अर्थात २०१३ सालमे भेल इतिहास छै ।
बर्साइन बजार ओहू समयमे सप्तरीक प्रमुख व्यापारिक केन्द्रमध्येक एक छल । ओना, एखनो अइछ । खासकइर धान, गहुम सहितक कृषि उपज खरिद बिक्री होइत आएल अइछ । एकर अतिरिक्त बर्साइनक मवेशी हटिया (पशु हाट) तराइ मधेशमे प्रसिद्ध रहैत आएल अइछ । बहुत दूरदूरसँ खास कइर बरद खरिद विक्री करए आबैत छल । वर्तमान समयमे खेतीपाती ट्रेक्टरसँ कएल जेबाक क्रम बढलास’ आब बर्साइनक मवेशी हटियामे कमी आइब रहल अइछ । खास कइर खेती किसानीक समय शुरु होयबासँ एक–दू महिना पहिनेसँ ई हटिया खौब जमै छल ।

एतऽ सँ तीन कलिोमीटर दक्षीणमे अवस्थित मानराजामे अवस्थित श्री ५ महेन्द्र चुन्नी माध्यमिक विद्यालय अइछ । एकर स्थापना २००८ सालमे अर्थात ७५ वर्ष पहिने भेल छलए । नेपालमे राजतन्त्र समाप्त भऽगेल छै, मुदा एहि विद्यालयक नाम परिवर्तन नै भेल छै । विद्यालयक नाम महेन्दे्र राजाक नामपर कायम छै । मानराजामे छोटछिन पहाड़जकाँ एकटा जगह छै । पत्रकार उमेशक कहब छैन– ई थान आपरुपी गढ़ीक रुपमे चर्चित छै । एहि गढ़ीमे देवदेवीक मुर्ती सेहो पाओल गेल छै । संरक्षणक अभावक समस्या झेलिरहल ई जगहकँे पुरातात्विक उत्खनन आ अनुसन्धान हएब जरुरी छै । पत्रकार उमेशऽक परामर्श अइछ–पुरतात्विक अध्ययन–अनुसन्धान सँ सम्भव छै जे नव ऐतिहासिक तथ्यसब आगाँ आबै आ राजनीतिकरुपेँ नेपाल आ भारतमे बँटाएल ई समाजऽक सन्दर्भमे नव जानकारी सार्वजनिक भऽ सकै ।

बरियारपट्टीमे आशु कवि शिवकुमार
हम उपर चर्चा कऽ चुकलौं जे हमरालोकैन बर्साइन सँ आगाँ बइढचुकल रही । आब हम सब कुश्माहर, प्रितमपुर, सेहरा, चन्ही, मलहनियाँ होइत वलान नदी पार करैत सिरहा जिलामे प्रवेश कऽ भगवानपुर वजार पहुँचल छलौं । एहि क्षेत्रक पुरान सभ्यतायुक्त वजार मानल जाइत अइछ भगवानपुर । एतऽ सँ १७ किलोमिटरके यात्रापश्चात लहान पहुँचल जा सकैत छै । भगवानपुरलग भारतीय सीमावर्ती क्षेत्र ठाढ़ी पड़ैत छै । हम एकबेर बहुत पहिने लहान सँ बस यात्रा करैत ठाढ़ी धैर सेहो पहुँचल छी ।
छोटछिन वजारऽक रुपमे रहल भगवानपुर एहि क्षेत्रमे पहिने सँ चर्चित रहैत आएल अइछ । एतऽ हमरालोकैन नै रुइक सोझें पश्चिमदिसि यात्रा जारी रखलौं आ भगवतीपुर, जगतपुर, नर्गी, कजरा, जानकीनगर होइत बरियारपट्टी पहुँचलौं । बर्साइन सँ करिव २८ किलोमीटरके दूरीमे अवस्थित ई स्थान एहि क्षेत्रक चर्चित आ महत्वपूर्ण स्थान छै । एतऽ सेहो हमर सम्पर्कमे अनुज, मुकेश यादव रहैत छैथ । राससकर्मी मुकेश बहुत दिन सँ एकबेर चाह पिबाक आग्रह कऽ रहल छलैथ । मुदा कहिओ पलखैत नै भेटैत छलए । एहिबेर सोचलौंं जे हुनकर आग्रह स्वीकार कएल जाए । हुनका फोन केलियैन । ओ वजारेमे रहैथ । कनेकाल ओतऽ विलैम कऽ हमसब चाहपान केलौं ।

वरियारपट्टी सँ हमर भावनात्मक सम्बन्ध अइछ । गत वर्ष (२०८१)क चैत चाइर आ पाँच गते हम एतै रही । आदरणीय अग्रज प्रसिद्ध मैथिली अभियानी विद्वान रामरिझन यादवजीकेँ संयोजनमे स्थानीय जनता माध्यमिक विद्यालयमे पत्रकारिता प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित भेल रहए आ हम सहजकर्ताक भूमिकामे उपस्थित रही । ओहि समयमे अग्रज याादवकेँ संयोजनमे चैत चाइर गते ओतऽ हमर जन्मदिन मनाएल गेल रहए । आभार अग्रज । एहिबेर बरियारपट्टीक भूमिपर पएर पडि़ते हमरा एक वर्ष पहिलुक ओ अवसर मोन पइड़गेल रहए । भावुक भऽ गेल रही । ओहि सन्दर्भमे सहकर्मीद्वय मुकेश आ उमेशऽक योगदान सेहो महवपूर्ण रहैन । एतै हमरा एक स्थानीय मैथिली आशु कवि शिवकुमार यादवजी सँ भेट भेल रहए । हुनक प्रतिभा देखि हम चकित रही । हुनकामे तत्काल मैथिली कविता गढबाक आ वाचन करबाक अदभूत क्षमता छैन । मिथिलाक ग्रामीण क्षेत्रमे एहन अनेक प्रतिभा भऽसकैत छैथ । आवश्यकता अइछ खोजी कऽ प्रोत्साहित करबाक ।
एहि स्थानमे पछिला एक वर्षमे बड़ बेसी परिवर्तन तँ नै एलैए मुदा स्थानीय वासिन्दाक मोताविक पछिला किछु वर्षमे एतऽ आमूल परिवर्तन अनुभव कएल गेलैए । एतऽ सँ सटले अइछ प्रसिद्ध देउरीपट्टी आ सीमावर्ती भारतीय क्षेत्रक प्रसिद्ध मिथिला–गाम लदनियाँ आ सिधपा । यातायातऽक माध्यमक अभावके अवस्थामे पहिने एतौका लोकऽकेँ दश किलोमीटरके दूरीमे अवस्थित नेपालऽक सिरहा वजार दूर बुझाई आ भारतीय वजार लदनियाँ नजदिक लगै । एहि क्षेत्रक वजारक आवश्यकता इएह लदनियाँ सँ पूरा होइक मुदा आब अवस्थामे परिवर्तन एलैए । आब हुलाकी सड़क सञ्चालनमे एलाक बाद बहुतो कारण सँ स्थानीय वासिन्दाके सिरहा वजार लग बुझाइत छैन आ ई स्वाभाविके अइछ ।
‘लाइफ लाइन’ हुलाकी सड़क
उपर हम किछु ठाम हुलाकी सड़क कहि चर्चा केलौं । आखिर कोन सड़क अइछ ई ? जे सड़ककेँ माध्यम सँ एहि क्षेत्रमे आमूल परिवर्तन अनुभूत कएल गेलै । ई हुलाकी अर्थात डाक (पोस्टल) सड़कऽक माध्यम सँ विगतमे एक ठाम सँ दोसर ठाम पैदल यात्रा कऽ चिठी–पत्र पहुँचाओल जाइत छलै । तहिआ आईजकाँ यातायातऽक माध्यमकेँ विकास नै भेल रहै । ई सड़क नेपालऽक पूर्वी सीमान झापा जिलाक भद्रपुर सँ पश्चिम नेपालऽक कञ्चनपुर जिलाक गड्डाचौकी धैर विस्तारित छै ।
नेपालऽक मधेश क्षेत्रक ‘लाइफ लाइन’ मानल जाएबला ई सड़क बहुत दिन धैर नै बइन सकलै । विगतमे २०१५ सालऽके चुनावक बाद गठित विपि कोइराला नेतृत्वक सरकारऽक समयमे ई सड़कऽक निर्माणक मुद्दा कार्यान्वयनके प्रयास कएल गेलै, मुदा २०१७ सालमे तात्कालीन राजा महेन्द्रद्वारा कोइराला सरकारकेँ अपदस्थ कएल गेलाक बाद ई सड़क निर्माणक कार्य एकप्रकारेँ खटाईमे पइड गेलै । परिणम ई जे नेपालऽक मूल मधेश वस्ती विकास सँ बहुत दूर भऽ गेल । देशक मूलधार सँ कइट कऽ रहबालेल बाध्य भऽ गेल मधेश । बादमे २०४६ सालऽक जनआन्दोलनपश्चात गठित सरकारसबहक समयमे ई सड़कऽक निर्माण कार्य आगाँ तँ बढ़ल मुदा गति बहुत मन्द रहलै । राजा महेन्द्रक नेतृत्वक पञ्चायती सरकार एहि सड़कक निर्माण कार्यकेँ स्थगित कऽ वर्तमानमे जे पूव–पश्चिम लोकमार्ग अइछ, तकर निर्माण कार्य आगाँ बढौलक । परिणाम सभऽक सोझाँ छै, कोनो विशेष टिप्प्णीक आवश्यकता नै ।
खण्डखण्डमे निर्माण कार्य आगाँ बढ़ल एहि सड़कक बहुत पैघ हिस्साक निर्माणकार्य एखनो आगाँ नै बइढ़ सकलैए । मुदा जे क्षेत्रमे काज भेलैए ओतऽ युगान्तकारी प्रभाव पड़ल अनुभूत कएल गेलैए । एहने एक क्षेत्र छै सिरहा–राजविराज खण्ड । ओना सिरहा सँ जनकपुर खण्ड सेहो बनल छै, मुदा सिरहा सँ करिव तीन÷चाइर किलोमीटरके दूरीमे रहल कमला नदीमे पूल सञ्चालनमे नै आइब सकलाक कारण ई खण्ड एखन पूर्ण प्रभावकारी नै भऽ सकल छै । एकर विपरित सिरहा–राजविराज खण्डकेँ ५५ किलोमीटर सड़क नीकजकाँ सञ्चालनमे अइछ । हम पछिला किछु वर्ष सँ जहिआ कहिओ पूर्वी नेपालऽक यात्रापर निकलै छी तँ चोहर्वा सँ सिरहा होइत इएह रस्ता पकैड़ राजविराज आ तकरबाद पूवदिसि जाइत छी । एहिबेर सेहो हम माघ सात गते काठमाण्डू सँ निकैल इएह रस्ते राजविराज गेल छलौं ।
जनजीवनमे सुधार
चोहर्वा सँ १८ किलोमीटर सिरहा आ सिरहा सँ औरहा, सन्हैठा, कृष्णपुर, रडियाहा चौक, गणेशपुर, नवटोली, औरही, दरहिया आ बरियारपट्टी । ओना सहजा पूल नै बइन सकल अइछ तैयो राजविराज धैरके यात्रा अत्यन्त सहज भऽ गेल अइछ । यात्रेटा नै सहज भेल छै जनजीवनमे सेहो सुधार भेल छै । सड़कऽक कातेकात बड़काबड़का घर, गामगाम बोर्डिगं स्कूल, यातायातहेतु सुविधाजनक साधन, प्रत्येक चौकपर वजार, नीक होटलसब आदि आदि । अनेक आधुनिक संरचनाक प्रभाव एतऽ एखन अनुभूत कएल जा सकै छै ।
पत्रकार उमेशके कहब छैन–ई सड़क सञ्चालनमे एलाक बाद एहि क्षेत्रमे आर्थिक गतिविधि बढ़लैए । निर्माण उद्योगमे तेजी एलैए । एतबए नै, एहि क्षेत्रक जमिनक दाममे नीक वृद्धि भेलैए । पहिने उच्च शिक्षालेल भारत जाए पड़ैत छलै, ताहि प्रवृत्तिमे कमी एलैए । तहिना दोसर पत्रकार मुकेश कहैत छैथ–हमरासभकेँ देखितेदेखिते बरियारेपट्टीटा नै बल्कि एहि सड़कऽक सम्पर्कमे रहल प्रत्येक गाममे सड़कसँगे आधुनिक युगऽक प्रभाव प्रवेश कएलजकाँ लगैैए । प्रत्येक चौक वजार बइनगेल छै ।
आब अपने गाममे रोजगार कऽ सकबाक सम्भावनाके विकास भेलैए । हुनक कहब छैन–सड़क एलाक बाद एहि क्षेत्रमे घर निर्माणके प्रक्रियामे परिवर्तन आएल छै । पहिने इटा, बाउल, सिमेन्ट, छड़ आदिक ढुवानीक समस्याक कारण पक्की घर निर्माण कार्य कठिन छलए, लोक पाइयो भऽ कऽ नीक जीवन जीवा सँ वञ्चित छलए । आब ओ अवस्थामे परिवर्तन एलैए । तहिना बरियारपट्टीस्थित जनता माध्यमिक विद्यालयक प्रधानाध्यापक विरवल यादवके अनुसार सड़कऽक कारण आएल परिवर्तनकँे निश्चय अस्वीकार नै कएल जा सकैए मुदा एकर प्रभाव मन्द अइछ ।
जमिन आ जनशक्तिक सम्भावना रहितो एहि क्षेत्रमे औद्योगिक वातावरणके निर्माण नै भऽ सकब दुखद अइछ । शिक्षक हरेराम यादवके अनुसार, सड़क तँ एलै मुदा विकासऽक प्रतिबद्धता नै आइब सकलै । ओ कहैत छैथ–एखन चुनावक समय छै, स्थानीय मतदातालोकैनकेँ चाहियैन जे एहि क्षेत्रमे सड़कसँगे विकासऽक आन पूर्वाधार निर्माण आ औद्योगिक वातावरण निर्माणक सुनिश्चितता तकैथ ।
कनेकाल बरियारपट्टी घुमैत आ ओतऽ चाह पिबैत कने समय व्यय भऽ गेल । ओतऽ सँ चलैतकाल घड़ी देखलियै भोरऽक दश बाइज चुकल छल । गाड़ीमे बैसि हमसब आगाँ बढ़लौं । गाड़ीक बाहर देखलियै मुकेश आ हुनक पत्नी हमरालोकैनकेँ हाथ हिलबैत विदाई कऽ रहल छलैथ । किछु वर्ष पहिने धैर हम एहि क्षेत्रक मादे मात्र सुननेटा रहियै मुदा आब हुलाकी सडकक कारण देख सकिलियै । बुझाएल जे एहि क्षेत्र सँ एक भावनात्मक निकटता बइढ गेल हुअए ।
(राष्ट्रिय समाचार समितिकक अध्यक्ष धर्मेन्द्र झा, पत्रकारिता, साहित्य एवम् समसामयिक विषयसबमे सशक्त रुपमे कलम चलबैत आइब रहल छइथ ।) सं.
तस्विरः धर्मेन्द्र विह्वल/श्यामसुन्दर पथिक


